GhazalLove ShayariLove shayari hindiLove shayari in hindiPoemSad ShayariShayari

Love shayari

मरज़-ए-जुदाई

महरुमी-ए-मरज़ है जुदाई की,
मशवरा चाहिये

उम्मीद में तेरी,
तन्हाई के दिन चार चाहिये।।

तेरी जुदाई का दर्द
सीने में बैठा है राज़ कर

आज दिल उदास है
इक मुलाकात चाहिये।।

आ जाओ पास तुम सांसे हैं
बिखरने लगी 

मरज़-ए-इश्क़ है लगा ,
तेरी इंतिहा चाहिये।।

तमन्ना इक ही है
अब तो दिल में मेरी

परेशां बहुत हूँ
बस तेरा अहसान चाहिये।।

बे-आसरा हो गया हूँ
अपनी ही धड़कनों से

उम्मीद में तेरी “मल्हार” है
आसरा चाहिये।।

“मल्हार”

Next

 

Tags

Malhar

मेरा नाम रोहित डोबरियाल है मेरी विशेष रुचि संगीत एवं लेखन में है। में शास्त्रीय संगीत में सितार वादक हूँ और सितार वादन और नयी कविताओं की रचना करना मुझे अच्छा लगता है इसी लिए मैने ख़ुद जरूरत महसूस करते हुए एक ऐसा साझा मंच का निर्माण किया जहां नए उभरते हुए साहित्यकार,लेखक अपने विचारों को कविताओं के माध्यम व्यक्त कर सकें

Related Articles

Leave a Reply

Close
Close