Shayari of Kumar Vishwas | कोई दीवाना कहता है (कविता) / कुमार विश्वास

कोई दीवाना कहता है (कविता) / कुमार विश्वास - shayari

BEST SHAYARI OF DR. KUMAR VISHWAS SHAYARI

सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा?
तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा,
भींग रही है काया सारी खजुराहो की मूरत सी,
इस दर्शन का और प्रदर्शन मत करना, मर जाऊँगा..!!


एक दो दिन में वो इकरार कहा आएगा
हर सुबह एक ही अखबार कहा आएगा
आज बंधा है जो इन् बातों में तो बहाल जायेंगे
रोज इन बाहों का त्यौहार कहा आएगा

उसी की तरहा मुझे सारा ज़माना चाहे,
वो मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे,
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,
ये मुसाफिर तो कोई ठिकाना चाहे..!!

हमारे शेर सुन कर भी जो खामोश इतना है
खुदा जाने गुरूर-ए-हुस्न में मदहोश कितना है
किसी प्याले से पुछा है सुराही मैं सबब में का
जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये के होश कितना है

क़लम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा,
गिरेबां अपना आँसू में भिगोता हूँ तो हंगामा,
नहीं मुझ पर भी जो खुद की ख़बर वो है ज़माने पर,
मैं हँसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा…!!

स्वंय से दूर हो तुम भी स्वंय से दूर है हम भी
बहुत मशहूर हो तुम भी बहुत मशहूर है हम भी
बड़े मगरूर हो तुम भी बड़े मगरूर है हम भी
अतः मजबूर हो तुम भी अतः मजबूर है हम भी

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