“तेरा दीदार”

तेरा जबसे दीदार हुआ है
मुझको तुझसे प्यार हुआ है,
दिल ये इश्क़ के बुखार से
पहली दफा दो चार हुआ है,
आकर चाँद ये आसमान में
याद तेरी फिर दिला रहा है,
कैसा ये अत्याचार हुआ है
मुझको तुझसे प्यार हुआ है,
तेरी चुप्पी अगर तेरी कोई मजबूरी है
तो रहने दे इश्क़ कौन सा जरुरी है
कोई गुनाह दिल ये कर बैठा है
जबसे तू निगाह-ए-खास हुआ है
जबसे तू निगाह-ए-खास हुआ है,

रोहित डोबरियाल
” मल्हार”

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