“तेरी नज़र”

नज़र से मेरी नज़र जो मिली तेरी
दिल की धड़कनें कुछ यूँ बढ़ी मेरी
ये दिल जो हो गया है अब तेरा
तू ही बता क्या कसूर इस में मेरा
गा रहा ये दिल तराने अब तेरे
बज रहा हो सितार जैसे दिल में मेरे
ख्यालों में डूबा हूं इस कदर अब तेरे
दिन गये चैन-ओ-सुकून वाले अब मेरे
बेवफ़ाई जो कर गयी नज़रें तेरी
किस्मत ही मुकर गयी हो जैसे मेरी
तुझे पा ना सकूँ तो मेरी क्या कमी है
बस आँखों में जिंदगी भर की नमी है
मेरे दिल में अब दर्द की क्या कमी है
बस आँखों में जिंदगी भर की नमी है
“मल्हार” अब मैं गाने लगा हूँ
अपने में ही कहीँ अब खोनें लगा हूँ

“मौलिक”

“मल्हार”

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