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ये अपना तो ख्वाब नही

था अपना तो ये ख्वाब नही
की सूना हो दिल-आंगन अपना
था अपना तो ऐसा प्यार नही
इम्तहान इश्क़ क्यों ले फिर इतना

जाओ दूर बिछुड़कर तुम मुझसे
था इतना नाज़ुक मेरा इश्क़ नही
तुम भी तो ये समझ ना पायी
था अपना तो ऐसा ख्वाब नही
शायद समझ ना पाया मैं भी
अब जो ठोकर खाया मैं भी
मैं अपने में ही स्वंय सिद्ध हूँ
प्रमाण इश्क में ना किसी ने पाया
था अपना तो ये ख्वाब नही
था अपना तो ऐसा प्यार नही

मौलिक

“मल्हार “

 

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Malhar

मेरा नाम रोहित डोबरियाल है मेरी विशेष रुचि संगीत एवं लेखन में है। में शास्त्रीय संगीत में सितार वादक हूँ और सितार वादन और नयी कविताओं की रचना करना मुझे अच्छा लगता है इसी लिए मैने ख़ुद जरूरत महसूस करते हुए एक ऐसा साझा मंच का निर्माण किया जहां नए उभरते हुए साहित्यकार,लेखक अपने विचारों को कविताओं के माध्यम व्यक्त कर सकें

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